पति-पत्नी (कहानी)
एक लड़का और लड़की आपस में एक दूसरे से बहुत प्यार करते थें ! उनका प्यार इस कदर का था, या यूँ कहें की उनका रिस्ता इस कदर का था, की वो एक दूसरे के बिना जी नहीं सकते थे !
लड़के की जान उस लड़की में तो लड़की की जान उस लड़के में रहती थीं !
उनके रिश्तो के बिच एक अलग हीं मिठास थी ! कुछ दीन बित गया भगवन शिव की महिमा से उनका विवाह हुआ और वो एक पति-पत्नी का रूप हो गए !
एक दिन की बात हैं जब पत्नी अपना श्रृंगार कर रही थी और अपने मांगो में अपने पति के नाम की सिंदूर भर रही थी, तभी उसका भोला पति उससे ये पूछा देवी ये सिंदूरी अपने मांगो में कियों भरती हो, भला इसका क्या अर्थ है ? एक पति-पत्नी के बिच इस सिन्दूर का क्या काम है ?
इन सभी सवालो से घिरे उस पत्नी ने बड़े हीं सरल तरीके से कहा !
मेरे प्रिये स्वामी जी ये शास्त्र, ये समाज, ये संसार, ये सभी कहते हैं, की अगर कोई भी पत्नी अपने मांगो में इस सिन्दूर को नियमित रूप से भरेगी तो उसके जीवन साथी की उम्र लम्बी होगी !
भगवन राम की लम्बी उम्र के लिए देवी सीता भी इस सिन्दूर को अपने मांगो में भरा करती थीं !
इन सभी बातो को सुन कर उस पति के आँखों में पानी भर आया , उसने ये तय किया की अगर मांगो में सिन्दूर भरने से अपने जीवन साथी की उम्र लम्बी होती है , तो मैं भी अपनी पत्नी के लिए अपने मांगो में सिन्दूर भरूंगा ये तय करने के बाद वो पति हर रोज स्नान करके चुपके से सिन्दूर दान से सिन्दूर चुराता और पत्नी के नाम से अपने मांगो में उस सिन्दूर को भर लेता ! इस तरह वो हर रोज़ करता और अपनी पत्नी के लिए लम्बी उम्र की कामना करता ! ये सील-सिला हर रोज चलता--
जब उस सिन्दूर दान से सिन्दूर बढ़ने लगा तो पत्नी को कुछ शक हुआ और वो इस बात को जानने के लिए एक दिन छुप गई ! हर रोज की तरह वो बेचारा पति स्नान करके आया और सिन्दूर दान से सिन्दूर निकाल कर अपने मांगो में सिन्दूर भरने लगा तभी उसकी पत्नी ने उस पति के हाथ पकड़ लिया और पूछने लगी मेरे बाबू, मेरे पति, जी आप ये क्या कर रहे हैं ?
इस सिन्दूर को अपने मांगो में आप कियों डाल रहे हैं ? इस सवालो से घिरे उस पति ने कहा देवी तुमने हीं कहा था की इसे अपने मांगो में भरने से जीवन साथी की उम्र लम्बी होती है ! मेरे रहते मेरी पत्नी का उम्र कहीं काम न पड जाये इसिलए, मैं अपने मांगो में इस पवित्र सिन्दूर को भर रहा था !
इतना सुनते हीं वो पत्नी, अपने पति के पैर में गिर पड़ी और रोने लगी, तभी उसके पति ने उसे उठाया और सीने से लगते हुए बड़े ही प्यार से कहा , देवी आपका जगह पैरो में नहीं इस दिल में हैं ! पत्नी ने कहा आप मुझसे बहुत प्यार करते हैं तो आप मुझे एक वचन दीजिये उस पत्नी ने उस वचन को कुछ इस तरीके से माँगा-------
सुबह की रोशनी अँधेरी शाम की हो !
मैं जितना भी जींव, मेरे जीवन की हर घरी,
आपके नाम की हो !!
अगर, बहुत प्यार करते हैं आप मुझसे,
तो एक वचन दीजिये मुझे,
मैं जभी मरुँ, मेरे मांगो में सिन्दूर आपके नाम की हो !!
इन बातो को सुनते ही पति अपनी पत्नी को बाँहों में भर कर रोने लगा !
सच्च में पति-पत्नी का रिश्ता एक पवित्र रिश्ता होता है, अगर उन रिश्तो के बिच विश्वाश हो !
कवि निलेश निशाकर
एक लड़का और लड़की आपस में एक दूसरे से बहुत प्यार करते थें ! उनका प्यार इस कदर का था, या यूँ कहें की उनका रिस्ता इस कदर का था, की वो एक दूसरे के बिना जी नहीं सकते थे !
लड़के की जान उस लड़की में तो लड़की की जान उस लड़के में रहती थीं !
उनके रिश्तो के बिच एक अलग हीं मिठास थी ! कुछ दीन बित गया भगवन शिव की महिमा से उनका विवाह हुआ और वो एक पति-पत्नी का रूप हो गए !
एक दिन की बात हैं जब पत्नी अपना श्रृंगार कर रही थी और अपने मांगो में अपने पति के नाम की सिंदूर भर रही थी, तभी उसका भोला पति उससे ये पूछा देवी ये सिंदूरी अपने मांगो में कियों भरती हो, भला इसका क्या अर्थ है ? एक पति-पत्नी के बिच इस सिन्दूर का क्या काम है ?
इन सभी सवालो से घिरे उस पत्नी ने बड़े हीं सरल तरीके से कहा !
मेरे प्रिये स्वामी जी ये शास्त्र, ये समाज, ये संसार, ये सभी कहते हैं, की अगर कोई भी पत्नी अपने मांगो में इस सिन्दूर को नियमित रूप से भरेगी तो उसके जीवन साथी की उम्र लम्बी होगी !
भगवन राम की लम्बी उम्र के लिए देवी सीता भी इस सिन्दूर को अपने मांगो में भरा करती थीं !
इन सभी बातो को सुन कर उस पति के आँखों में पानी भर आया , उसने ये तय किया की अगर मांगो में सिन्दूर भरने से अपने जीवन साथी की उम्र लम्बी होती है , तो मैं भी अपनी पत्नी के लिए अपने मांगो में सिन्दूर भरूंगा ये तय करने के बाद वो पति हर रोज स्नान करके चुपके से सिन्दूर दान से सिन्दूर चुराता और पत्नी के नाम से अपने मांगो में उस सिन्दूर को भर लेता ! इस तरह वो हर रोज़ करता और अपनी पत्नी के लिए लम्बी उम्र की कामना करता ! ये सील-सिला हर रोज चलता--
जब उस सिन्दूर दान से सिन्दूर बढ़ने लगा तो पत्नी को कुछ शक हुआ और वो इस बात को जानने के लिए एक दिन छुप गई ! हर रोज की तरह वो बेचारा पति स्नान करके आया और सिन्दूर दान से सिन्दूर निकाल कर अपने मांगो में सिन्दूर भरने लगा तभी उसकी पत्नी ने उस पति के हाथ पकड़ लिया और पूछने लगी मेरे बाबू, मेरे पति, जी आप ये क्या कर रहे हैं ?
इस सिन्दूर को अपने मांगो में आप कियों डाल रहे हैं ? इस सवालो से घिरे उस पति ने कहा देवी तुमने हीं कहा था की इसे अपने मांगो में भरने से जीवन साथी की उम्र लम्बी होती है ! मेरे रहते मेरी पत्नी का उम्र कहीं काम न पड जाये इसिलए, मैं अपने मांगो में इस पवित्र सिन्दूर को भर रहा था !
इतना सुनते हीं वो पत्नी, अपने पति के पैर में गिर पड़ी और रोने लगी, तभी उसके पति ने उसे उठाया और सीने से लगते हुए बड़े ही प्यार से कहा , देवी आपका जगह पैरो में नहीं इस दिल में हैं ! पत्नी ने कहा आप मुझसे बहुत प्यार करते हैं तो आप मुझे एक वचन दीजिये उस पत्नी ने उस वचन को कुछ इस तरीके से माँगा-------
सुबह की रोशनी अँधेरी शाम की हो !
मैं जितना भी जींव, मेरे जीवन की हर घरी,
आपके नाम की हो !!
अगर, बहुत प्यार करते हैं आप मुझसे,
तो एक वचन दीजिये मुझे,
मैं जभी मरुँ, मेरे मांगो में सिन्दूर आपके नाम की हो !!
इन बातो को सुनते ही पति अपनी पत्नी को बाँहों में भर कर रोने लगा !
सच्च में पति-पत्नी का रिश्ता एक पवित्र रिश्ता होता है, अगर उन रिश्तो के बिच विश्वाश हो !
कवि निलेश निशाकर
No comments:
Post a Comment
Thank you for Comment Nilesh Nishakar