पति-पत्नी (कहानी)

एक लड़का और लड़की आपस में एक दूसरे से बहुत प्यार करते थें ! उनका प्यार इस कदर का था, या यूँ कहें की उनका रिस्ता इस कदर का था, की वो एक दूसरे के बिना जी नहीं सकते थे !
लड़के की जान उस लड़की में तो लड़की की जान उस लड़के में रहती थीं !
उनके रिश्तो के बिच एक अलग हीं मिठास थी ! कुछ दीन बित गया भगवन शिव की महिमा से उनका विवाह हुआ और वो एक पति-पत्नी का रूप हो गए ! 
एक दिन की बात हैं जब पत्नी अपना श्रृंगार कर रही थी और अपने मांगो में अपने पति के नाम की सिंदूर भर रही थी, तभी उसका भोला पति उससे ये पूछा देवी ये सिंदूरी अपने मांगो में कियों भरती हो, भला इसका क्या अर्थ है ? एक पति-पत्नी के बिच इस सिन्दूर का क्या काम है ?
इन सभी सवालो से घिरे उस पत्नी ने बड़े हीं सरल तरीके से कहा !
मेरे प्रिये स्वामी जी ये शास्त्र, ये समाज, ये संसार, ये सभी कहते हैं, की अगर कोई भी पत्नी अपने मांगो में इस सिन्दूर को नियमित रूप से भरेगी तो उसके जीवन साथी की उम्र लम्बी होगी !
भगवन राम की लम्बी उम्र के लिए देवी सीता भी इस सिन्दूर को अपने मांगो में भरा करती थीं ! 
इन सभी बातो को सुन कर उस पति के आँखों में पानी भर आया , उसने ये तय किया की अगर मांगो में सिन्दूर भरने से अपने जीवन साथी की उम्र लम्बी होती है , तो मैं भी अपनी पत्नी के लिए अपने मांगो में सिन्दूर भरूंगा ये तय करने के बाद वो पति हर रोज स्नान करके चुपके से सिन्दूर दान से सिन्दूर चुराता और पत्नी के नाम से अपने मांगो में उस सिन्दूर को भर लेता ! इस तरह वो हर रोज़ करता और अपनी पत्नी के लिए लम्बी उम्र की कामना करता ! ये सील-सिला हर रोज चलता--
जब उस सिन्दूर दान से सिन्दूर बढ़ने लगा तो पत्नी को कुछ शक हुआ और वो इस बात को जानने के लिए एक दिन छुप गई ! हर रोज की तरह वो बेचारा पति स्नान करके आया और सिन्दूर दान से सिन्दूर निकाल कर अपने मांगो में सिन्दूर भरने लगा तभी उसकी पत्नी ने उस पति के हाथ पकड़ लिया और पूछने लगी मेरे बाबू, मेरे पति, जी आप ये क्या कर रहे हैं ?
इस सिन्दूर को अपने मांगो में आप कियों डाल रहे हैं ? इस सवालो से घिरे उस पति ने कहा देवी तुमने हीं कहा था की इसे अपने मांगो में भरने से जीवन साथी की उम्र लम्बी होती है ! मेरे रहते मेरी पत्नी का उम्र कहीं काम न पड जाये इसिलए, मैं अपने मांगो में इस पवित्र सिन्दूर को भर रहा था !
इतना सुनते हीं वो पत्नी, अपने पति के पैर में गिर पड़ी और रोने लगी, तभी उसके पति ने उसे उठाया और सीने से लगते हुए बड़े ही प्यार से कहा , देवी आपका जगह पैरो में नहीं इस दिल में हैं ! पत्नी ने कहा आप मुझसे बहुत प्यार करते हैं तो आप मुझे एक वचन दीजिये उस पत्नी ने उस वचन को कुछ इस तरीके से माँगा-------

सुबह की रोशनी अँधेरी शाम की हो !
मैं जितना भी जींव, मेरे जीवन की हर घरी,
आपके नाम की हो !!
अगर, बहुत प्यार करते हैं आप मुझसे,
तो एक वचन दीजिये मुझे,
मैं जभी मरुँ, मेरे मांगो में सिन्दूर आपके नाम की हो !!

इन बातो को सुनते ही पति अपनी पत्नी को बाँहों में भर कर रोने लगा !
सच्च में पति-पत्नी का रिश्ता एक पवित्र रिश्ता होता है, अगर उन रिश्तो के बिच विश्वाश हो ! 

कवि निलेश निशाकर 




उस जालिम का नाम क्या था ?

सपनो में मिली तो सपनो को सजाने को कहा !
हकिकत में मिली तो दिल लगाने को कहा !
अरे ख्वावों का खत थमा दिया उसने,
मेरे इन कोमल से हांथो में,
जब खत पढ़ने चला
तो दिया हुआ खत, जलने को कहा !!

खत जलने क्या चला, ये दिल जलने लगा

मोहब्बत के मेले में था, अकेला और मैं भूलने लगा
पर मैं भुला सका न उसको, जो कभी याद आई नहीं
खत के बदले मैंने कागज़ जला दिया
पर आज तक वो खत जलाई नहीं !!

कैसे जलाता......

उसके वक्त के साथ
मेरा हालत जो बदलता गया
जीतनी दूर वो जाती गई
उतना हीं मैं मचलता गया !!

क्या पाया और क्या खोया उसने

ये अभी मुझे पता नहीं 
पर हाँ.....
मेरे सपनो में सिर्फ वो आया करती थी
मैं कभी जाता नहीं !!

कियों जाऊं....

बिना आँशु का रोना
उसके आँखों के फिदरत की मेल है
किसी से मिलना और किसी से बिछड़ना
ये मेरे किस्मत की खेल है !!

इस किस्मत ने उसके लिए......

न सुबह लिखा था,
 न शाम लिखा था,
न जमीं लिखा था,
न आसमां लिखा था,
जो ख्याल आया मेरे दिल में ,
बस वही ,ख्याल उसके नाम लिखा था !!

ये मत पूछो...

उन ख्यालो का अंजाम क्या था,
जिसने डुबो दिया मुझे 
इस दर्द की दरिया में
कैसे बताऊँ.....
उस जालिम का नाम क्या था ?
!!!!धन्यवाद!!!!
कवि निलेश निशाकर 
दिल के कुछ अल्फ़ाज़ 

अगर कोई आपको अच्छा लगता है,
तो अच्छा वो नहीं, अच्छे आप हैं
कियों की आप उसमे उसके अच्छे को तलाश रहे हैं !
अगर कोई आपको बुरा लगता है,
तो बुरा वो नहीं, बुरे आप हैं,
कियों की आप उसके अंदर सिर्फ 
उसके बुराई को तलाश रहे हैं
इसलिए खुबशुरत होना खाश नहीं हैं
बल्कि किसी के लिए खाश होना हीं खूबशूरती है
कभी खुबशुरत इंशान से मोहब्बत नहीं होती
बल्कि जिस इंशान से मोहब्बत हो जाये
वो इंशान खुबशुरत हो जाता है
प्यार में पागल कहने वाले एक बात समझलो
बहुत देखा समझदार बन कर, पर ख़ुशी
हमेशा पागल बनने पर मिलती है
इसलिए किसी भी पागल को कभी पागल मत कहो
कियों की वो पागल आप से कहीं ज्यादा खुश है !
!!!!धन्यवाद!!!!
कवि निलेश निशाकर 

वो ज़माना याद आता है!(कविता)

वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के
आज वो ज़माना याद आता है
उसका आना, मेरा देखना
मेरा बोलना ,उसका सुनना
आज वो शर्माना याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

हांथो में फ़ोन लेकर, उसके फ़ोन का इंतजार करना
धीरे धीरे बातें करना, और उसके बातों से प्यार करना
बातों हि बातों के बिच
उस टावर का चला जाना याद अता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

छुप छुप कर मिलने आना
एक दूसरे के बाँहों में सो जाना
मीठी मीठी बातें करना 
बातों के बिच उस समय खा खो जाना 
जाते जाते एक दूजे का वो रोना याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

उसका रूठना और मेरा मानना
मेरा रूठना और उसका मानना
एक दूसरे से मान जाना वो तराना याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

रिस्तो के बिच मोहब्बत का कुर्बान होना
सब कुछ जान कर सब के बिच अनजान होना
हर क्लेश पर  निलेश का परेशान होना  याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है
!!!!धन्यवाद!!!!
कवि निलेश निशाकर

जब प्यार किसी से होता है!(कविता)

जब प्यार किसी से होता है !
हर दर्द दवा बन जाता है !
क्या चीज मोहब्बत होती है !
एक शख्श खुदा बन जाता है !

ये लब चाहे खामोश रहे,

आँखों से पता चल जाता है !
कोई लाख छुपा ले इश्क़ मगर,
इस दुनिया को पता चल जाता है !

जब इश्क़ का जादू चढ़ता है,

गुलशन में फूल खिल जाता है !
जब कोई दिवाना मचलता है,
तब ताजमहल बन जाता है !

लैला ने नाम दिया मजनू का, 
रांझा ने हीर दिया !
इस इश्क़ में किसी ने ताजमहल बनवाया,
किसी ने पहाड़ को चिर दिया !

ये इश्क़ करने वाले करते नहीं क्लेश !

चलो इतिहास को दोहराया जाये
कहे कवि निलेश !
           !!!! धन्यवाद !!!!!
        कवि निलेश निशाकर 
मेरे विचार (कवि की कलम से)

1. इंशान की सोच ही उसकी माहान्ता की प्रतिबिम्ब होती है !
   .................  कवि निलेश निशाकर 

2. लड़ना है तो अपने आने वाली कठिनाइयों से लड़ो किसी इंशान से नहीं !
  ................  कवि निलेश निशाकर 

3. इंशान से लड़ने पर सिर्फ नफ़रत पैदा होती है पर कठिनाइयों से लड़ोगे तो अंदर की शक्तियां पैदा होंगी !
   .................  कवि निलेश निशाकर 

4. महान वो नहीं जिसने किसी को हरा कर अपनी जित हासिल की हो बल्कि महान वो है जिसके हारने से लाखो      लोगो ने जितने का तरीका सीखा !
  .................  कवि निलेश निशाकर 

5. माता-पिता एक पगडण्डी की तरह होते हैं ,जिस पर उनके बच्चे चलते हैं अगर पगडण्डी (रास्ता) ही ख़राब हो      जायेगा तो बच्चो का भविष्य अर्थात भारत का भविष्य सुनिशचित नहीं हो सकता !
 ................  कवि निलेश निशाकर 

6. किसी के प्रति हमें ये नहीं सोचना चाहिए की वो हमारे प्रति क्या सोच रहा है बल्कि हमें ये सोचना चाहिए की हम उसके प्रति क्या सोच रहे हैं !
 .................  कवि निलेश निशाकर 

7. अगर हम अपनी सोच से अपना भविष्य बदल सकते हैं तो हम सब मिलकर अपनी सोच से भारत का         भविष्य  सुनिश्चित कियों नहीं कर लेते !
 .................  कवि निलेश निशाकर 

 8. चाहने वालो को आज तक वो नहीं मिला जिसकी वो अपेक्षा करते हैं , पर करने वालो को वो सब मिल जाता है   जिसकी वो अपेक्षा नहीं करते शायद इसलिए चाहने और करने में फर्क होता है !
................  कवि निलेश निशाकर 

                 !!!!धन्यवाद !!!!!


   सच्चा प्यार रंग लता है (प्रेम कहानी)


बात उस समय की है जब मैं आठवीं कक्षा में पढता था मेरा दोस्त राजेश भी उस समय आठवीं क्लास में था, उसको चौदह साल की उम्र में ही पहला प्यार हो गया था|

राजेश का ये पहला प्यार उसकी क्लास में पढ़ने वाली लड़की “नीलम” के साथ था| नीलम अमीर घराने की लड़की घराने की लड़की होने के साथ, मेरे पंचायत की मुखिया जी की भी लड़की थी  उम्र यही कोई 13 -14 साल ही होगी और दिखने में बला की खूबसूरत थी|

राजेश मन ही मन नीलम को दिल दे बैठा था लेकिन हमेशा कहने से डरता था| राजेश के पिता एक स्कूल में अध्यापक थे| उनका परिवार भी सामान्य ही था इसीलिए डर से राजेश कभी प्यार का इजहार नहीं करता था|

चलो इस प्यार के बहाने राजेश की एक गन्दी आदत सुधर गयी| राजेश आये दिन स्कूल ना जाने के नए नए बहाने बनाता था लेकिन आज कल टाइम से तैयार होके चुपचाप स्कूल चला आता था| माँ बाप सोचते बच्चा सुधर गया है लेकिन बेटे का दिल तो कहीं और अटक चुका था|

समय ऐसे ही बीतता गया…लेकिन राजेश को  कभी प्यार का इजहार करने की हिम्मत नहीं हुई बस चोरी छिपे ही नीलम को देखा करता था| हाँ कभी -कभी उन दोनों में बात भी होती थी लेकिन पढाई के टॉपिक पर ही.. राजेश दिल की बात ना कह पाया , समय गुजरा,,आठवीं पास की, नौवीं पास की…अब दसवीं पास कर चुके थे लेकिन चाहत अभी भी दिल में ही दबी थी|

आज स्कूल का अंतिम दिन था| राजेश मन ही मन उदास था कि शायद अब नीलम को शायद ही देख पायेगा क्यूंकि राजेश के पिता की इच्छा थी कि दसवीं के बाद बेटे को बड़े शहर में पढ़ाने भेजें|
स्कूल के अंतिम दिन सारे दोस्त एक दूसरे से प्यार से गले मिल रहे थे, अपनी यादें शेयर कर रहे थे| नीलम भी अपनी फ्रेंड्स के साथ काफी खुश थी आज..सब एन्जॉय कर रहे थे,, अंतिम दिन जो था लेकिन राजेश की आँखों में आंसू थे|

राजेश चुपचाप क्लास में गया और नीलम के बैग से उसका स्कूल identity card निकाल लिया| उस कार्ड पर नीलम की प्यारी सी फोटो थी| राजेश ने सोचा कि इस फोटो को देखकर ही मैं अपने प्यार को याद किया करूंगा|
बैंक से लोन लेकर पिताजी ने राजेश को बाहर पढ़ने भेज दिया| नीलम के पिता ने भी किसी दूसरे शहर में बड़ा मकान बना लिया और वहां शिफ्ट हो गए| राजेश अब हमेशा के लिए नीलम से जुदा हो चुका था|

समय अपनी रफ़्तार से बीतता गया,, राजेश ने अपनी पढाई पूरी की और अब एक बड़ी कम्पनी में नौकरी भी करने लगा था, अच्छी तनख्वाह भी थी लेकिन जिंदगी में एक कमी हमेशा खलती थी – वो थी नीलम।।
लाख कोशिशों के बाद भी राजेश फिर कभी नीलम से मिल नहीं पाया था|

घर वालों ने राजेश की शादी एक सुन्दर लड़की से कर दी और संयोग से उस लड़की का नाम भी नीलम ही था| राजेश जब भी अपनी पत्नी को नीलम नाम से पुकारता उसके दिल की धड़कन तेज हो उठती थी| आखों के आगे बचपन की तस्वीरें उभर आया करतीं थी|

पत्नी को उसने कभी इस बात का अहसास ना होने दिया था लेकिन आज भी नीलम से सच्चा प्यार करता था| एक दिन राजेश कुछ फाइल्स तलाश कर रहा था कि अचानक उसे नीलम का वो बचपन का Identity Card मिल गया| उस पर छपे नीलम के प्यारे से चेहरे को देखकर राजेश भावुक हो उठा कि तभी पत्नी अंदर आ गयी और उसने भी वह फोटो देख ली| फिर उनके बिच कुछ इस तरह की बातें हुई..

पत्नी – यह कौन है ? जरा इसकी फोटो मुझे दिखाओ
राजेश – अरे कुछ नहीं, ये ऐसे ही बचपन में दोस्त थी
पत्नी – अरे यह तो मेरी ही फोटो है, ये मेरा बचपन का फोटो है, देखो ये लिखा “स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल पवना” यहीं तो पढ़ती थी मैं
राजेश यह सुनकर ख़ुशी से पागल सा हो गया – क्या  तुम्हारी फोटो है ?
मैं इस लड़की से बचपन से बहुत प्यार करता हूँ नीलम ने अब राजेश को अपनी पर्सनल डायरी दिखाई जहाँ नीलम की कई बचपन की फोटो लगीं थीं| राजेश की पत्नी वास्तव में वही नीलम थी जिसे वह बचपन से प्यार करता था|

नीलम ने राजेश के आंसू पोंछा और प्यार से उसे गले लगा लिया क्यूंकि वह आज से नहीं बल्कि बचपन से ही उसका चाहने वाला था| राजेश बार बार भगवान् का शुक्रिया अदा कर रहा था!!

दोस्तों वो कहते हैं ना कि प्यार अगर सच्चा हो तो रंग लाता ही है| ठीक वही हुआ राजेश और नीलम के साथ भी.
!!!धन्यवाद!!!!
 कवि निलेश निशाकर 
           जीवन आसान हो जाएगा(छोटी कहानी) 

साथियों, हम सभी को अपनी ज़िन्दगी में कभी ना कभी मुहोब्बत ज़रूर होती है | आपको भी हुई होगी और अगर ना हुई हो तो अब हो जाएगी | सभी के दिलों का अरमान होता है, कि जिनसे उन्हें मुहोब्बत है वो भी उनसे उतनी ही मुहोब्बत करें और अगर मुहोब्बत सच्ची हो तो आग दोनों तरफ लगी होती है | इसलिए लगभग हर लव स्टोरी की कहानी में हमें कहीं ना कहीं हमारी कहानी छुपी हुई दिखाई देती है | इसलिए मैं कवि निलेश निशाकर आप सभी पाठकों के लिए कुछ खास लव स्टोरी  पेश करने जा रहा हूँ .....(.इसके पहले मैंने एक आमिर लड़की और गरीब लड़के की एक छोटी सी प्रेम कहानी आपके सामने पेश की थी, आज मैं आपके सामने एक आमिर लड़का और गरीब लड़की की कहानी पेश करने जा रहा हूँ !)

एक अमीर लड़का था. उसे एक गरीब किसान की लड़की से प्यार हो गया. लड़की सुंदर होने के साथ-साथ काफी समझदार थी. एक दिन जब लड़के ने उस लड़की को बताया कि "वह उससे प्यार करता है, और उससे शादी करना चाहता है"  तो लड़की ने कुछ सोचने के बाद उस लड़के को शादी करने से इनकार कर दिया. क्योंकि - वह गरीब परिवार से रिश्ता रखती थी, लेकिन कुछ समय बाद जब ये बात उस लड़के को पता चली, तो उस ने लड़की के माता-पिता से बात की और उस लड़की को समझाया. काफी समझाने के बाद वह लड़की मान गयी और दोनों की शादी हो गयी.शादी के बाद, लड़का उसे बहुत प्यार करता था. दोनों का दांपत्य जीवन काफी अच्छा चल रहा था, लेकिन कुछ महीनों बाद लड़की को चर्मरोग हो गया. जिसके कारण उसकी खूबसूरती ढलने लगी. अब लड़की को यह डर भी सताने लगा, "कि उसकी खूबसूरती ढलने के कारण, कहीं उसका पति उसे छोड़ न दे." लड़की उस चर्म रोग को ठीक करने का हर संभव प्रयास कर रही थी! समय बीत रहा था और लड़की की खूबसूरती धीरे-धीरे ढल रही थी. एक दिन वह लड़का एक काम से दूसरे शहर गया. लड़का जब वहां से वापस आ रहा था.  तो उसका रास्ते में एक कार के साथ एक्सीडेंट हो गया.  उस दुर्घटना के दौरान लड़के की आंखें की रोशनी चली गई! इस दुर्घटना के कुछ समय के बाद उनका जीवन फिर से सामान्य और सुखी बीतने लगा. वह लड़की चर्मरोग की वजह से दिन प्रतिदिन कमजोर और बदसूरत होती गई. लेकिन पति अंधा होने के कारण उनका दांपत्य जीवन ठीक चलता रहा. और दिखाई न देने के कारण, वह लड़का उस से पहले की तरह प्यार करता रहा. कुछ सालो बाद बीमारी के कारण उस लड़की की मृत्यु हो गई. पत्नी की मृत्यु होने के बाद, वह लड़का अंदर से दुखी हो गया, और वह शहर छोड़कर जाने वाला था. तभी उसके पड़ोसी ने उसे सांत्वना देते हुए कहा-- "अब आप तो अपनी पत्नी के बिना अकेले पड़ जाएंगे. वह आपका काफी ख्याल रखती थी. अब आपका जीवन अंधकार में कैसे व्यतीत होगा."
तब उस लड़के ने अपने पड़ोसी की ओर देखा और गहरी सांस लेते हुए कहा-- "मैं कभी अंधा था ही नहीं. लेकिन मैं यह सोचकर अंधे होने का नाटक करता रहा, कि कहीं मेरी पत्नी को उसकी बीमारी और बदसूरती के कारण यह ना लगे. कि मैं उससे प्यार नहीं करता. इसीलिए! मैं इतने सालों तक बिना कुछ कहे हुए अपनी पत्नी की खुशी के लिए अंधा बना रहा."  यह बात सुनकर पड़ोसी की आंखों से आंसू छलक आए और वह लड़का वहां से उठकर चला गया....!
जाते जाते ज्ञान की बात कवि की कलम से....
अगर आप जीवन भर खुश रहना चाहते हैं,
तो आप लोगों की कमियों की तरफ ही नहीं उनकी खूबियों की तरफ भी गौर करिए.
आपका जीवन आसान हो जाएगा!
...................पढ़ने के लिए धन्यवाद..............
                 कवि निलेश निशाकर 
                  आंकी का निलेश
आँखों में आंसू   झलक उठा था !
कितनी दूर है मंजिल ये सोच कर तड़प उठा था !
काली घटा रोक लेती हैं मुझे मोहब्बत के मेले में !
निकलता हूँ जब भी घर से रोना आ जाता है अकेले में !
लेकर पैगाम भेजो अपने किसी कबूतर को !
शादी के बंधन में बांध दो मेरे प्रश्नो और अपने उत्तर को !
     ढूंढ़ते रहा जाओगे (कविता)

ना  चिठ्ठी ना कोई  संदेश ,
मैं चला जाऊंगा वैसा देश
छोड़ कर अपका ये प्रदेश,
ढूंढ़ते रहा जाओगे
हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे

वहां कोई न अपना, न होता है पराया
देश है वो ऐसा , वहां होती नहीं माया
हम यहां हैं जैसे, होंगे न वहां वैसे ,पहचान पाओगे न ये फेस,
ढूंढते रह जाओगे
हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे

वहां न प्रेम होता, होता न द्धेष है
रब जाने उनका अपना कैसा वो देश है
न विष्णु न महेश , न लक्ष्मी न गणेश
ढूंढते रह जाओगे
 हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे

याद आएंगी मेरी सारी बातें,
कटे नहीं काटेंगी दिन और राते
करना वैसा कोई न काम जिससे पहुंचे किसी को क्लेश,
रो रो कर कह रहा इन बातो को निलेश
ढूंढते रह जाओगे
हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे       

           कवी निलेश निशाकर 
  
   
         क्या यही प्यार है?(कविता)

जिस तरह चाहा था मैंने उनको,
किसी ने चाहा नहीं होगा !
जो बातें कही है मैंने उनसे एक खत के जरिये ,
किसी ने कहा नहीं होगा !!

जब सपने सजा रहे थे एक हो जाने की, 
तो वो कहा करती थी तुम से कोई खास नहीं है !
जब मंजिल सामने आई और उनका हाथ माँगा, 
तो उनहो ने बड़े ही बेरहम से कहा,
अब तुम्हारे प्यार का अहसास नहीं है!!

मोहबत के मेले में छोड़ कर चली गई,
वो मुझको हंसती हंसती !
बस खुदा ही जाने वो किन लवो से कहा करती थी,
मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकती !!

कितनी खुश नशिब है वो, 
जो आज भी खुश है वो, 
किसी बड़े से शहर में !
कितना बदनशीब हूँ मैं,
मुझको मौत भी नहीं मिलती,
किसी भयानक से जहर में !!

दिल को दिल से मिलाया था हमने, जिस्म को जिस्म से !
कसम से, 
रिश्ते भी यहां बदल जाते हैं इस चेहरें की किस्म से !!

अरे लम्हो को सजा कर मैं उनसे प्यार करता था !
वो पल भर के लिए जाती थी,
और मैं घंटो इंतज़ार करता था !!

अब तो हर गम में तरस जाता है,
ये दिल एक बून्द शराब के लिए !
लिखा हुआ खत भी रो पड़ता था मेरा, 
उनके खत के जबाब के लिए !!

खून से लिखी खतों को वो बदनाम कर गई !
जो सिंदूर थी मेरे नाम की,
न जाने वो किसके नाम कर गई !!

लिखे हुए खत की भी कुछ ख्वाइसे थी ये खता नहीं चला !
हम रहम से कब  बेरहम बन गए ये हमको पता नहीं चला !!

प्यार तो वो होता है,
जो नजरो से चढ़ कर दील में उतर जाये !
दूर रह कर भी पास होने का अहसास हो, 
और उनकी यादो में जिंदगी गुजर जाये !!

मेरे दिल के बिस्तर पर आज भी वो दस्ताने सो रहे हैं !
मेरे दिल के अहसास ने अभी अभी मुझको बताया, 
मेरे अल्फाजो को पढ़ कर पढ़ने वाले भी रो रहे हैं !!

चुप हो जा मेरे धड़कते हुए दिल,
तेरे मुस्कुराने का अभी भी इंतज़ार है !
जो बेवफा रोला कर चली गई तुझको,
शायद उसकी नजरो में यही प्यार है !!

                                      कवी निलेश निशाकर 


         एक इश्क़ ऐसा भी(प्रेम कहानी)

एक मोहल्लें में एक शायर बाज आशिक़ रहा करता था और उसी मोहल्लें से आमिर घर की एक लड़की पढ़ने के लिए जाया करती थी शायर बाज आशिक़ उस लड़की को बेहद प्यार करता था इतना जितना की समुन्द्र में पानी, आमिर घर की लड़की जभी पढ़ने के लिए उसके मोहल्लें से गुजरती वो शायर बाज आशिक़ उसे देखने के लिए अपने छत के जीने पर जाकर खड़ा हो जाता, और जैसे ही वो लड़की उसके घर के करीब आती वो शायर बाज आशिक़ एक शायरी बोलता,
   “”””वो बड़े घर वाली कहा चली, दुपटा तान कर सीने पर
   जरा ऊपर भी देख ले, एक प्यासा अस्मा खड़ा है छत के जीने पर”””
पहले दिन लड़की कुछ नहीं बोली और वो चली गई बेचारा वो शायर बाज आशिक़ उदास हो गया !
 दूसरे दीन जब वो फिर आमिर घर की लड़की उसी प्रेम गली से गुजर रही थी तो वो फिर शायर बाज आशिक़ बोला,
‘’’’’’’कियों गुजरती है मेरे घर के इतने करीब से
जरा एक बार तो नज़ारे मिला ले इस आशिक़ ग़रीब से’’
दूसरे  दिन भी वो आमिर लड़की कुछ नहीं बोली और चली गई! एक बार फिर वो शायर बाज आशिक़ उदास हो गया! जब तीसरे दिन वो आमिर लड़की फिर उसी रस्ते से गुजर रही थी तो वो शायर बाज आशिक़ एक बार फिर हर बार की तरह शायरी बोलता है ,और कहता है,
’’’’ये जाते जाते मनचली कुछ बाते पूछ लेअपने दिल की ईमान से
धरती भी प्यास बुझाने के लिए मांगती है पानी आसमान से
आज जो देखा तूने इस आसमां की तरफ तो फिर ये आसमां मिलेगा किसी शमसान पे’’’
 सब दिन की तरह उस दिन भी वो मनचली लड़की चली जाती है और सब की दिन तरह वो शायर बाज आशिक़ भी उदास हो जाता है वो शायर बाज न जाने क्या सोच रहा था और अपने छत के जीने से निचे की तरफ उतर रहा था, पर अफ़सोस न जाने उस खुदा को क्या मंजूर था उस आशिक़ का पैर अचानक से फिसल गया और वो प्यार में शहीद हो गया!
पर उस खुदा ने भी गजब का खेल खेला जब वो आशिक़ मर गया तब उस लड़की के दिल में उस आशिक़ के लिए प्यार जगा! पूरी रात वो लड़की सो नहीं पाई, उसके लिए एक पल एक साल जैसा होने लगा! अगले दिन सुबह होते ही वो लड़की लाल रंग के एक लिबाज़ में दुल्हन की तरह सज कर उससे मिलने के लिए चली गई! हर रोज की तरह इस बार भी वो लड़की उसी प्रेम गली से गुजर रही थी लेकिन इस बार उसे किसी की आवाज सुनाई नहीं पड़ी, वो लड़की सोचने लगी आखिर कियों उस लड़के की आवाज नहीं आई इतना सन्नाटा कियों है! इन्ही सब बातो को सोचते सोचते वो वापस उस घर के करीब पहुंची जिस घर से वो शहीद शायर बाज आशिक़ शायरियां किया करता था!
जब उस घर के करीब वो शायर बाज आशिक़ नजर नहीं आया तो वो चिंतिति हो गई और वहां खड़े एक अनजान अजनबी से वो  इस भाव से पूछती है जिस भाव से उसका आशिक़ उसको पुकारा करता था, उस लड़की ने उस अजनबी से कहा.....
’’’’’’ये अनजान अजनबी जरा ये तो बता दे
जो शायर बाज आशिक़शायरियां किया करता था,
इस छत के जीने से उसका घर तो दिखा दे’’’’’’’ 
पर उस लड़की को क्या पता की वो अनजान अजनबी उस आशिक़ का चाचा है लेकिन उस आशिक़ के चाचा ने भी उसी भाव में उसके प्रश्नो को उत्तर देता है और कहता है..
’’’जो आशिक़ शायरियां किया करता था वो तो सभी के दिलो का राजा है
छोड़ गया वो एक इंतज़ार किसी के इंतज़ार में आज सज रहा उसका जनाजा है’’’’’
जैसे ही उसने ये सुना उस लड़की का होश उड़ गया और वो कुछ पल के लिए थम सी गई।
इधर उस आशिक़ का जनाजा शमशान की तरफ चला गया था इतने देर में लड़की भी उसी जगह पर चली गई जहाँ पर उस आशिक़ का जनाजा गया था वो लड़की रोती बिलखती उस जनाजे के पास जाकर बोलती है,
’’’ये मेरे अनजान आशिक़ आई हूँ तेरी शमशान पर
देख दुपट्टा फैलाई मांगती हूँ तेरा प्यार,
प्यार देकर एक अहसान कर’’’’’’’’’’’’’’’’
तभी उसी पल उस जनाजे पर लेते पार्थिक शरीर से एक आवाज़ आती है,
’’’ये मेरे खुदा ये तेरी कैसी खुदाई है
जो लड़की बोलने पर भी पास नहीं आया करती थी,
आज वो मेरा जनाजा जलने आई है’’’’’’’’’’’’’’’’’
तब इस आवाज को सुन कर लड़की ने बड़े ही भावुक भाव में उस खुदा उस भगवन से कहा,
’’’’ये मेरे खुदा मेरी मोहब्बत तो अभी अनजान है...
जो जनाजा लेता है मेरे नजरो के आगे, 
वो जनाजा नहीं मेरी जान है...
एक रहेम कर मुझ पर और लौटा दे मेरा प्यार,
मैं मान जाउंगी की तूही भगवान है’’’’’’’’’’’
                                                   
                                            कवी नीलेश निशाकर