क्या यही प्यार है?(कविता)

जिस तरह चाहा था मैंने उनको,
किसी ने चाहा नहीं होगा !
जो बातें कही है मैंने उनसे एक खत के जरिये ,
किसी ने कहा नहीं होगा !!

जब सपने सजा रहे थे एक हो जाने की, 
तो वो कहा करती थी तुम से कोई खास नहीं है !
जब मंजिल सामने आई और उनका हाथ माँगा, 
तो उनहो ने बड़े ही बेरहम से कहा,
अब तुम्हारे प्यार का अहसास नहीं है!!

मोहबत के मेले में छोड़ कर चली गई,
वो मुझको हंसती हंसती !
बस खुदा ही जाने वो किन लवो से कहा करती थी,
मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकती !!

कितनी खुश नशिब है वो, 
जो आज भी खुश है वो, 
किसी बड़े से शहर में !
कितना बदनशीब हूँ मैं,
मुझको मौत भी नहीं मिलती,
किसी भयानक से जहर में !!

दिल को दिल से मिलाया था हमने, जिस्म को जिस्म से !
कसम से, 
रिश्ते भी यहां बदल जाते हैं इस चेहरें की किस्म से !!

अरे लम्हो को सजा कर मैं उनसे प्यार करता था !
वो पल भर के लिए जाती थी,
और मैं घंटो इंतज़ार करता था !!

अब तो हर गम में तरस जाता है,
ये दिल एक बून्द शराब के लिए !
लिखा हुआ खत भी रो पड़ता था मेरा, 
उनके खत के जबाब के लिए !!

खून से लिखी खतों को वो बदनाम कर गई !
जो सिंदूर थी मेरे नाम की,
न जाने वो किसके नाम कर गई !!

लिखे हुए खत की भी कुछ ख्वाइसे थी ये खता नहीं चला !
हम रहम से कब  बेरहम बन गए ये हमको पता नहीं चला !!

प्यार तो वो होता है,
जो नजरो से चढ़ कर दील में उतर जाये !
दूर रह कर भी पास होने का अहसास हो, 
और उनकी यादो में जिंदगी गुजर जाये !!

मेरे दिल के बिस्तर पर आज भी वो दस्ताने सो रहे हैं !
मेरे दिल के अहसास ने अभी अभी मुझको बताया, 
मेरे अल्फाजो को पढ़ कर पढ़ने वाले भी रो रहे हैं !!

चुप हो जा मेरे धड़कते हुए दिल,
तेरे मुस्कुराने का अभी भी इंतज़ार है !
जो बेवफा रोला कर चली गई तुझको,
शायद उसकी नजरो में यही प्यार है !!

                                      कवी निलेश निशाकर 

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