ढूंढ़ते रहा जाओगे (कविता)

ना  चिठ्ठी ना कोई  संदेश ,
मैं चला जाऊंगा वैसा देश
छोड़ कर अपका ये प्रदेश,
ढूंढ़ते रहा जाओगे
हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे

वहां कोई न अपना, न होता है पराया
देश है वो ऐसा , वहां होती नहीं माया
हम यहां हैं जैसे, होंगे न वहां वैसे ,पहचान पाओगे न ये फेस,
ढूंढते रह जाओगे
हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे

वहां न प्रेम होता, होता न द्धेष है
रब जाने उनका अपना कैसा वो देश है
न विष्णु न महेश , न लक्ष्मी न गणेश
ढूंढते रह जाओगे
 हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे

याद आएंगी मेरी सारी बातें,
कटे नहीं काटेंगी दिन और राते
करना वैसा कोई न काम जिससे पहुंचे किसी को क्लेश,
रो रो कर कह रहा इन बातो को निलेश
ढूंढते रह जाओगे
हम न मिल पाएंगे, जब भी याद आएंगे       

           कवी निलेश निशाकर 
  

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Thank you for Comment Nilesh Nishakar