एक इश्क़ ऐसा भी(प्रेम कहानी)
एक मोहल्लें में एक
शायर बाज आशिक़ रहा करता था और उसी मोहल्लें से आमिर घर की एक लड़की पढ़ने के लिए जाया
करती थी शायर बाज आशिक़ उस लड़की को बेहद प्यार करता था इतना जितना की समुन्द्र में पानी,
आमिर घर की लड़की जभी पढ़ने के लिए उसके मोहल्लें से गुजरती वो शायर बाज आशिक़ उसे देखने
के लिए अपने छत के जीने पर जाकर खड़ा हो जाता, और जैसे ही वो लड़की उसके घर के करीब आती
वो शायर बाज आशिक़ एक शायरी बोलता,
“”””वो बड़े घर वाली कहा चली, दुपटा तान कर सीने पर
जरा ऊपर भी देख ले, एक प्यासा अस्मा खड़ा है छत के जीने पर”””
पहले दिन लड़की कुछ नहीं बोली और
वो चली गई बेचारा वो शायर बाज आशिक़ उदास हो गया !
दूसरे दीन जब वो फिर आमिर घर की लड़की उसी प्रेम
गली से गुजर रही थी तो वो फिर शायर बाज आशिक़ बोला,
‘’’’’’’कियों गुजरती है मेरे घर के इतने करीब से
जरा एक बार तो नज़ारे मिला ले इस आशिक़ ग़रीब से’’
जरा एक बार तो नज़ारे मिला ले इस आशिक़ ग़रीब से’’
दूसरे दिन भी वो आमिर लड़की कुछ नहीं बोली और चली गई! एक बार फिर वो शायर बाज आशिक़ उदास
हो गया! जब तीसरे दिन वो आमिर लड़की फिर उसी रस्ते से गुजर
रही थी तो वो शायर बाज आशिक़ एक बार फिर हर बार की तरह शायरी बोलता है ,और कहता है,
’’’’ये जाते जाते मनचली कुछ बाते पूछ ले, अपने दिल की ईमान से
धरती भी प्यास बुझाने के लिए मांगती है पानी आसमान से
आज जो न देखा तूने इस आसमां की तरफ तो फिर ये आसमां मिलेगा किसी शमसान पे’’’
आज जो न देखा तूने इस आसमां की तरफ तो फिर ये आसमां मिलेगा किसी शमसान पे’’’
पर उस खुदा ने भी गजब का खेल खेला जब वो आशिक़ मर गया तब उस लड़की के दिल में उस आशिक़ के लिए प्यार जगा! पूरी रात वो लड़की सो नहीं पाई, उसके लिए एक पल एक साल जैसा होने लगा!
अगले दिन सुबह होते ही वो लड़की लाल रंग के एक लिबाज़ में दुल्हन की तरह सज कर उससे मिलने
के लिए चली गई! हर रोज की तरह इस बार भी वो लड़की
उसी प्रेम गली से गुजर रही थी लेकिन इस बार उसे किसी की आवाज सुनाई नहीं पड़ी, वो लड़की
सोचने लगी आखिर कियों उस लड़के की आवाज नहीं आई इतना सन्नाटा कियों है! इन्ही सब बातो
को सोचते सोचते वो वापस उस घर के करीब पहुंची जिस घर से वो शहीद शायर बाज आशिक़ शायरियां
किया करता था!
जब उस घर के करीब वो शायर बाज आशिक़ नजर नहीं आया तो वो चिंतिति हो गई और वहां खड़े एक अनजान अजनबी से वो इस भाव से पूछती है जिस भाव से उसका आशिक़ उसको पुकारा
करता था, उस लड़की ने उस अजनबी से कहा.....
’’’’’’ये अनजान अजनबी जरा ये तो बता दे
जो शायर बाज आशिक़, शायरियां किया करता था,
’’’’’’ये अनजान अजनबी जरा ये तो बता दे
जो शायर बाज आशिक़, शायरियां किया करता था,
इस छत के जीने से उसका घर तो दिखा दे’’’’’’’
पर उस लड़की को क्या पता की वो अनजान अजनबी उस आशिक़ का चाचा है लेकिन उस आशिक़ के चाचा ने भी उसी भाव में उसके प्रश्नो को उत्तर देता है और कहता है..
’’’जो आशिक़ शायरियां किया करता था वो तो सभी के दिलो का राजा है
’’’जो आशिक़ शायरियां किया करता था वो तो सभी के दिलो का राजा है
छोड़ गया वो एक इंतज़ार किसी के इंतज़ार में आज सज रहा उसका जनाजा है’’’’’
जैसे ही उसने ये सुना उस लड़की का होश उड़ गया और वो कुछ पल के लिए थम सी गई।
जैसे ही उसने ये सुना उस लड़की का होश उड़ गया और वो कुछ पल के लिए थम सी गई।
इधर उस आशिक़ का जनाजा शमशान की
तरफ चला गया था इतने देर में लड़की भी उसी जगह पर चली गई जहाँ पर उस आशिक़ का जनाजा गया
था वो लड़की रोती बिलखती उस जनाजे के पास जाकर बोलती है,
’’’ये मेरे अनजान आशिक़ आई
हूँ तेरी शमशान पर
देख दुपट्टा फैलाई मांगती हूँ तेरा प्यार,
देख दुपट्टा फैलाई मांगती हूँ तेरा प्यार,
प्यार देकर एक अहसान कर’’’’’’’’’’’’’’’’
तभी उसी पल उस जनाजे पर लेते पार्थिक
शरीर से एक आवाज़ आती है,
’’’ये मेरे खुदा ये
तेरी कैसी खुदाई है
जो लड़की बोलने पर भी पास नहीं
आया करती थी,
आज वो मेरा जनाजा जलने आई
है’’’’’’’’’’’’’’’’’
तब इस आवाज को सुन कर लड़की ने
बड़े ही भावुक भाव में उस खुदा उस भगवन से कहा,
’’’’ये मेरे खुदा मेरी मोहब्बत
तो अभी अनजान है...
जो जनाजा लेता है मेरे नजरो के आगे,
वो जनाजा नहीं मेरी जान है...
एक रहेम कर मुझ पर और लौटा दे मेरा प्यार,
वो जनाजा नहीं मेरी जान है...
एक रहेम कर मुझ पर और लौटा दे मेरा प्यार,
मैं मान जाउंगी की तूही भगवान
है’’’’’’’’’’’
कवी नीलेश निशाकर
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Thank you for Comment Nilesh Nishakar