वो ज़माना याद आता है!(कविता)

वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के
आज वो ज़माना याद आता है
उसका आना, मेरा देखना
मेरा बोलना ,उसका सुनना
आज वो शर्माना याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

हांथो में फ़ोन लेकर, उसके फ़ोन का इंतजार करना
धीरे धीरे बातें करना, और उसके बातों से प्यार करना
बातों हि बातों के बिच
उस टावर का चला जाना याद अता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

छुप छुप कर मिलने आना
एक दूसरे के बाँहों में सो जाना
मीठी मीठी बातें करना 
बातों के बिच उस समय खा खो जाना 
जाते जाते एक दूजे का वो रोना याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

उसका रूठना और मेरा मानना
मेरा रूठना और उसका मानना
एक दूसरे से मान जाना वो तराना याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है

रिस्तो के बिच मोहब्बत का कुर्बान होना
सब कुछ जान कर सब के बिच अनजान होना
हर क्लेश पर  निलेश का परेशान होना  याद आता है
वर्षो बित गये मेरी मोहब्बत के,
आज वो ज़माना याद आता है
!!!!धन्यवाद!!!!
कवि निलेश निशाकर

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Thank you for Comment Nilesh Nishakar